About Me:
Dr. Tulsi Bhardwaj is an academician cum author as well social worker cum Politician. Before coming in social politics, she has been attached to different institutes like IARI, Delhi; SVPUAT, Meerut.etc, also endowed with Australian govt. prestigious endeavour award. She worked at CSIRO South Australia and has been authors of many scientific and social books as well as research articles, columns in both Hindi and English National News Papers. Besides running many social impact campaigns, also provides facility for authors to publish via her NGO. Dr Bhardwaj received many National and International Awards during her professional career including. Best Oral Presentation Award, Fellowship Award, Best Research Scholar Award, Young Scientist Award, Endeavour Post Doctorate Award by Australian Govt. She owes life membership of many National and International societies. During her professional services Dr. Tulsi Bhardwaj has been involved in organizing conferences and seminars at her own initiatives. Actively involved in Foreign Collaboration with CSIRO, Australia network and Australia–India Strategic Research Fund (AISRF), SARDI (South Australian Research and Development Institute) for formulation of project proposals. As an active member of Entomological Society of America, USA Represented from IARI PUSA at International Conference on Advances in Agricultural, Biological & Environmental Sciences (AABES-2015) at London (United Kingdom) from 23-25 July 2015 then in Australia.
डा. तुलसी भारद्वाज का जन्म मुजफ्फरनगर के ऐसे जाने माने शिक्षित परिवार में हुया, जिसने कई IAS, सैन्य अधिकारी एवं समाजसेवी समाज को दिए। जिनमे मुख्यतः दादाजी स्वर्गीय श्री रामपाल भारद्वाज, IAS (पूर्व कमिश्नर आगरा मंडल), उनके बड़े भाई स्वर्गीय श्री रामरतन भारद्वाज, IAS (पूर्व मुख्य सचिव पंजाब); पिता जी स्वर्गीय श्री जगदीश चरण भारद्वाज, B.D.O; ताऊजी स्वर्गीय श्री कर्नल नाम महेश भारद्वाज, (संस्थापक सदस्य, भारतीय किसान यूनियन); स्वर्गीय मेजर हरदयाल भरद्वाज (शहीद 1969 के भारत-चीन युद्ध); चाचाजी स्व शंभूचरण भारद्वाज, पूर्व विधानसभा उमीदवार, मुज़फ्फरनगर एवं चाची श्रीमति बीना भरद्वाज, पूर्व उपाध्यक्ष,जिला पंचायत, मुज़फ्फरनगर आदि शामिल है। उनका विवाह, श्री वीरेंद्र पाल त्यागी जी, लेक्चरर ,पुत्र श्री अनुज कुमार जी से हुआ जो भारतीय नौसेना में कार्यरत रहते हुए देश सेवा के उपरांत अब केनरा बैंक में कार्यरतहोने के साथ भारतीय मजदूर संघ की (CBWO) में राष्ट्रिय महामंत्री भी हैं. डा तुलसी भरद्वाज ने डॉक्टरेट के बाद भारतीय कृषि अनुसंधान में वैज्ञानिक के रूप में सेवाए दी। उसी दौरान उन्हें ऑस्ट्रेलिआ सरकार के तरफ से बहुत ही प्रतिष्ठित एंडेवर पोस्टडॉक्टरेट फ़ेलोशिप प्राप्त हुई। ऑस्ट्रेलिआ में प्राप्त पी आर के अवसर को त्याग कर वापिस आकर भारत में ही रह कर काम करने को चुना। एक लेखिका के रूप में शैक्षिक क्षेत्र के अलावा सामाजिक जीवन पर भी लिखती रही है साथ ही है। सामजिक चुनैतियों पर भी विभिन्न पहलुओं पर सक्रीय रहते हुए ज्वलंत मुद्दों पर अपनी आवाज़ उठाती रही। आगरा में अपने विद्यार्थी जीवन के दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद, ब्रिज प्रान्त से सक्रीय रूप से जुडी रही। फिर दिल्ली प्रान्त के ABVP में सक्रीय भागीदारी दिखाई और कई स्टूडेंट्स प्रोटेस्ट्स में सक्रिय रही । अपने सामजिक जीवन में भाजपा की क्षेत्रीय पश्चिमी उत्तर प्रदेश की टीम में होने के कारण महत्वपूर्ण अभियानों में संयोजिका के रूप में कार्यरत होने के साथ साथ 2014 से लगातार चुनावो मे सक्रिय रूप से योगदान दिया एवं गांव व् क्षेत्र मे नुक्कड़ सभाओ का आयोजन कराये । विशेष रुप से अंबेडकर एवं मुस्लिम महिलाओं/ पुरुषों को सरकार की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित कराने के लिए जागरूकता अभियान चलाये । वैज्ञानिक एवं विद्यार्थियों के बीच भारतीय संस्कृति के मूल्यों को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ विशेष रूप से बौद्धिक वर्ग के माननीय प्रवक्ताओं वर्कशॉप्स का आयोजन कराया । भारत सरकार के फार्मर फर्स्ट कार्यक्रम के तहत विभिन्न गांवो में वैज्ञानिक दलों के तकनीकी सलाह के कार्यक्रम आयोजित करवाए। कृषि मंत्रालय परियोजनाओ में किसानो को जागरूक करने के लिए सक्रीय योगदान दिया । ओर्गनiइजिंग सेक्रेटरी के रूप में कई कृषि एवं किसान आधारित राष्ट्रिय कांफ्रेंस आयोजित कराने का श्रेय इन्ही को जाता है ।भारत सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओ का संकलन के साथ किसानो को जागरूक बनाने लिए कार्यशाला कराती रही है अपने कार्यकाल के दौरान, पार्टी के नेतृत्व में क्षेत्र महिलाओं के लिए विभिन्न ट्रेनिंग एवं वर्कशॉप आयोजित भी करवाई । लगभग २५ वर्ष के अपने ऐकडेमिक जीवन के बाद अब डॉ भारद्वाज अब पूर्ण रूप से सामाजिक सेवाओं के लिए कृति बद्ध है। उनका मानना है की किसी भी समाज के बौद्धिक वर्ग उसके विकास महत्वपूर्ण योगदान होता है। इसलिए बुद्धिजीवी वर्ग देश को दिशा दिखने में सदैव प्रयत्नशील रहना चाहिए।